प्रस्तावना (Introduction)
21वीं सदी में विश्व के समक्ष गरीबी, भूख, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय क्षरण, लैंगिक असमानता, बेरोजगारी तथा सामाजिक विषमता जैसी अनेक चुनौतियाँ उभरकर सामने आई हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल आर्थिक विकास से संभव नहीं है, बल्कि ऐसा विकास आवश्यक है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों को भी सुरक्षित रख सके। इसी विचार को सतत विकास (Sustainable Development) कहा जाता है। वैश्विक स्तर पर सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से United Nations (संयुक्त राष्ट्र) ने वर्ष 2015 में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को अपनाया। ये लक्ष्य मानव कल्याण, आर्थिक समृद्धि, सामाजिक न्याय तथा पर्यावरण संरक्षण के मध्य संतुलन स्थापित करने का व्यापक प्रयास हैं। SDGs को विश्व के सभी देशों द्वारा 2030 तक प्राप्त करने हेतु स्वीकार किया गया है और इन्हें "2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट" का आधार माना जाता है।
सतत विकास की अवधारणा (Concept of Sustainable Development)
सतत विकास की सर्वाधिक प्रचलित परिभाषा World Commission on Environment and Development (ब्रंटलैंड आयोग) की 1987 की रिपोर्ट Our Common Future में दी गई थी:
"ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करे, बिना भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति की क्षमता को प्रभावित किए।"
सतत विकास तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
1. आर्थिक स्थिरता (Economic Sustainability)
दीर्घकालिक आर्थिक विकास और रोजगार सृजन।
2. सामाजिक समावेशन (Social Sustainability)
समानता, सामाजिक न्याय एवं मानव विकास को बढ़ावा देना।
3. पर्यावरणीय संरक्षण (Environmental Sustainability)
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का उद्भव
सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (MDGs)
वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र ने Millennium Development Goals (MDGs) निर्धारित किए थे, जिनकी समयावधि 2000 से 2015 तक थी।
MDGs की उपलब्धियों एवं सीमाओं को ध्यान में रखते हुए 2015 में SDGs को अपनाया गया।
SDGs को अपनाना
- तिथि: 25 सितम्बर 2015
- स्थान: United Nations Headquarters
- सदस्य देश: 193
- लक्ष्य अवधि: 2015–2030
सतत विकास लक्ष्यों की विशेषताएँ
1. सार्वभौमिकता (Universality)
ये लक्ष्य सभी देशों पर समान रूप से लागू होते हैं।
2. समावेशिता (Inclusiveness)
इनका मूल सिद्धांत है—"Leave No One Behind" अर्थात किसी को भी पीछे न छोड़ना।
3. एकीकृत दृष्टिकोण (Integrated Approach)
आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय आयामों का समन्वय।
4. साझेदारी आधारित विकास
सरकार, निजी क्षेत्र एवं नागरिक समाज की भागीदारी।
5. मापन एवं निगरानी
लक्ष्यों की प्रगति मापने हेतु 169 लक्ष्य (Targets) एवं 230 से अधिक संकेतक (Indicators) निर्धारित किए गए हैं।
सतत विकास के 17 लक्ष्य (17 Sustainable Development Goals)
लक्ष्य 1: गरीबी उन्मूलन (No Poverty)
सभी प्रकार की गरीबी का अंत करना।
लक्ष्य 2: भूखमुक्त विश्व (Zero Hunger)
भूख समाप्त करना तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
लक्ष्य 3: उत्तम स्वास्थ्य एवं कल्याण (Good Health and Well-being)
सभी आयु वर्गों के लिए स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देना।
लक्ष्य 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)
समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
लक्ष्य 5: लैंगिक समानता (Gender Equality)
महिलाओं एवं बालिकाओं का सशक्तिकरण।
लक्ष्य 6: स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (Clean Water and Sanitation)
सभी के लिए सुरक्षित जल एवं स्वच्छता सुविधाएँ।
लक्ष्य 7: सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा (Affordable and Clean Energy)
नवीकरणीय एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना।
लक्ष्य 8: सम्मानजनक कार्य एवं आर्थिक वृद्धि (Decent Work and Economic Growth)
रोजगार एवं समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना।
लक्ष्य 9: उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना (Industry, Innovation and Infrastructure)
मजबूत अवसंरचना एवं नवाचार को बढ़ावा देना।
लक्ष्य 10: असमानताओं में कमी (Reduced Inequalities)
देशों के भीतर एवं देशों के बीच असमानताओं को कम करना।
लक्ष्य 11: सतत शहर एवं समुदाय (Sustainable Cities and Communities)
सुरक्षित एवं समावेशी शहरों का निर्माण।
लक्ष्य 12: जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन (Responsible Consumption and Production)
संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना।
लक्ष्य 13: जलवायु कार्रवाई (Climate Action)
जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रभावी कदम उठाना।
लक्ष्य 14: जलमंडलीय जीवन (Life Below Water)
महासागरों एवं समुद्री संसाधनों का संरक्षण।
लक्ष्य 15: स्थलीय जीवन (Life on Land)
वनों, जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा।
लक्ष्य 16: शांति, न्याय एवं सशक्त संस्थाएँ (Peace, Justice and Strong Institutions)
शांतिपूर्ण एवं उत्तरदायी संस्थाओं को बढ़ावा देना।
लक्ष्य 17: लक्ष्यों हेतु वैश्विक साझेदारी (Partnerships for the Goals)
अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं साझेदारी को मजबूत बनाना।
भारत और सतत विकास लक्ष्य
भारत ने SDGs को अपनी विकास नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
प्रमुख पहलें
1. नीति आयोग (NITI Aayog)
SDGs के क्रियान्वयन एवं निगरानी का प्रमुख संस्थान।
2. स्वच्छ भारत मिशन
SDG-6 से संबंधित।
3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
SDG-3 से संबंधित।
4. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
SDG-5 से संबंधित।
5. प्रधानमंत्री आवास योजना
SDG-11 से संबंधित।
6. जल जीवन मिशन
SDG-6 से संबंधित।
7. राष्ट्रीय सौर मिशन
SDG-7 एवं SDG-13 से संबंधित।
SDGs का महत्व
1. गरीबी एवं भूख उन्मूलन
वैश्विक स्तर पर मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार।
2. सामाजिक न्याय
समान अवसर एवं समावेशी विकास।
3. पर्यावरण संरक्षण
प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग।
4. आर्थिक विकास
दीर्घकालिक एवं संतुलित विकास।
5. वैश्विक सहयोग
देशों के बीच साझेदारी एवं सहयोग को बढ़ावा।
SDGs के समक्ष चुनौतियाँ
1. वित्तीय संसाधनों की कमी
विकासशील देशों में पर्याप्त निवेश का अभाव।
2. जलवायु परिवर्तन
प्राकृतिक आपदाएँ एवं पर्यावरणीय संकट।
3. गरीबी एवं असमानता
कई देशों में अभी भी व्यापक गरीबी।
4. राजनीतिक अस्थिरता
संघर्ष एवं युद्ध विकास को प्रभावित करते हैं।
5. कोविड-19 महामारी का प्रभाव
स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव।
6. तकनीकी एवं संस्थागत चुनौतियाँ
प्रभावी निगरानी एवं क्रियान्वयन में कठिनाई।
SDGs की आलोचना
- लक्ष्य अत्यधिक व्यापक एवं महत्वाकांक्षी हैं।
- कई देशों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं।
- विकसित एवं विकासशील देशों की परिस्थितियाँ भिन्न हैं।
- प्रगति के मापन में कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ हैं।
- वैश्विक सहयोग की कमी लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा बन सकती है।
निष्कर्ष
सतत विकास लक्ष्य (SDGs) मानवता के लिए एक व्यापक वैश्विक विकास एजेंडा हैं, जिनका उद्देश्य आर्थिक समृद्धि, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। ये लक्ष्य केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि नागरिक समाज, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। भारत सहित विश्व के सभी देशों के लिए SDGs एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करते हैं, जो 2030 तक एक अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण, समृद्ध एवं सतत विश्व के निर्माण में सहायक हो सकते हैं।
UGC NET / UPSC हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- SDGs अपनाए गए: 25 सितम्बर 2015
- अवधि: 2015–2030
- कुल लक्ष्य: 17
- कुल उप-लक्ष्य (Targets): 169
- मुख्य सिद्धांत: Leave No One Behind
- SDGs की निगरानी भारत में: नीति आयोग
- पूर्ववर्ती कार्यक्रम: Millennium Development Goals (MDGs)
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