प्रस्तावना
व्यवसाय संगठन (Business Organization) वाणिज्य
शिक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यापार, उद्योग, बैंकिंग, परिवहन,
बीमा, प्रबंधन एवं आधुनिक व्यावसायिक
प्रक्रियाओं का ज्ञान प्रदान करना है। वर्तमान वैश्विक एवं प्रतिस्पर्धात्मक युग
में व्यवसाय शिक्षा विद्यार्थियों को आर्थिक गतिविधियों, उद्यमिता
तथा रोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक बनाती है। विद्यालयी शिक्षा में व्यवसाय संगठन का पाठ्यक्रम विभिन्न
स्तरों पर विद्यार्थियों की मानसिक क्षमता एवं आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया
जाता है। राज्य बोर्ड तथा Central Board of Secondary Education (CBSE) दोनों ही विद्यार्थियों में व्यावसायिक ज्ञान, कौशल एवं व्यवहारिक समझ विकसित करने पर बल देते हैं।
व्यवसाय संगठन का
अर्थ
व्यवसाय संगठन से आशय व्यापार एवं उद्योग की संरचना, संचालन एवं प्रबंधन की प्रक्रिया से है। इसमें व्यवसाय के
विभिन्न स्वरूप, वित्तीय संस्थाएँ, विपणन, परिवहन, बीमा,
बैंकिंग तथा उद्यमिता आदि का अध्ययन किया जाता है।
व्यवसाय संगठन शिक्षण
के उद्देश्य (Aims
and Objectives)
1. व्यावसायिक
ज्ञान प्रदान करना
विद्यार्थियों को व्यापार, उद्योग
एवं वाणिज्य की मूलभूत अवधारणाओं का ज्ञान देना।
2. उद्यमिता
का विकास
विद्यार्थियों में स्वरोजगार एवं उद्यमिता की भावना विकसित
करना।
3. आर्थिक
जागरूकता
व्यवसाय एवं अर्थव्यवस्था के संबंध को समझाना तथा आर्थिक
गतिविधियों के प्रति जागरूक बनाना।
4. निर्णय
क्षमता का विकास
व्यापारिक समस्याओं के समाधान एवं निर्णय लेने की क्षमता
विकसित करना।
5. व्यावहारिक
कौशल का विकास
लेखा, विपणन, बैंकिंग
एवं प्रबंधन संबंधी व्यावहारिक कौशल विकसित करना।
6. नैतिक
मूल्यों का विकास
व्यवसाय में ईमानदारी, सामाजिक
उत्तरदायित्व एवं नैतिकता की भावना विकसित करना।
7. रोजगारोन्मुख
शिक्षा
विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगार एवं व्यवसाय के अवसरों के
लिए तैयार करना।
विभिन्न स्तरों पर
व्यवसाय संगठन का पाठ्यक्रम
1. माध्यमिक
स्तर (Secondary Level)
इस स्तर पर विद्यार्थियों को व्यवसाय की प्रारंभिक जानकारी दी
जाती है।
प्रमुख विषय-वस्तु
- व्यापार का अर्थ एवं प्रकार
- व्यवसाय के उद्देश्य
- व्यापार एवं उद्योग
- बैंकिंग एवं बीमा का परिचय
- परिवहन एवं संचार
- उपभोक्ता जागरूकता
उद्देश्य
- व्यवसाय के प्रति रुचि उत्पन्न करना
- आर्थिक गतिविधियों की समझ विकसित करना
- दैनिक जीवन में व्यापार की भूमिका समझाना
2. उच्च
माध्यमिक स्तर (Senior Secondary Level)
इस स्तर पर व्यवसाय संगठन का विस्तृत एवं व्यवस्थित अध्ययन
कराया जाता है।
CBSE पाठ्यक्रम
की प्रमुख विषय-वस्तु
Central Board of Secondary Education के अंतर्गत कक्षा 11 एवं
12 में Business Studies विषय पढ़ाया जाता है।
प्रमुख इकाइयाँ
- व्यवसाय, व्यापार एवं वाणिज्य
- व्यवसाय के स्वरूप
- निजी,
सार्वजनिक एवं वैश्विक उपक्रम
- व्यावसायिक सेवाएँ
- व्यापारिक वित्त
- विपणन प्रबंधन
- उपभोक्ता संरक्षण
- उद्यमिता विकास
उद्देश्य
- व्यवसाय प्रबंधन की समझ विकसित करना
- नेतृत्व एवं प्रबंधकीय क्षमता विकसित करना
- व्यवसायिक निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना
3. राज्य
बोर्ड पाठ्यक्रम
विभिन्न राज्य बोर्डों में व्यवसाय संगठन का पाठ्यक्रम स्थानीय
आवश्यकताओं एवं क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों के अनुसार तैयार किया जाता है।
उदाहरण के लिए Board of Secondary Education Rajasthan में वाणिज्य विषय के अंतर्गत व्यापार, बैंकिंग,
सहकारिता एवं स्थानीय उद्योगों से संबंधित विषय शामिल किए जाते
हैं।
विशेषताएँ
- क्षेत्रीय व्यापारिक गतिविधियों पर बल
- स्थानीय उद्योग एवं कृषि आधारित व्यवसाय
का अध्ययन
- सरल एवं व्यवहारिक शिक्षण सामग्री
विषय-वस्तु का संगठन
(Content
Organization)
व्यवसाय संगठन की विषय-वस्तु को क्रमबद्ध एवं तार्किक रूप से
प्रस्तुत किया जाता है।
1. सरल
से जटिल की ओर
प्रारंभिक स्तर पर सरल अवधारणाएँ तथा उच्च स्तर पर विस्तृत
अध्ययन कराया जाता है।
2. सिद्धांत
एवं व्यवहार का समन्वय
सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक उदाहरण एवं परियोजना कार्य
शामिल किए जाते हैं।
3. इकाई
आधारित संगठन
पाठ्यक्रम को विभिन्न इकाइयों एवं अध्यायों में विभाजित किया
जाता है।
4. जीवनोपयोगी
दृष्टिकोण
विषय-वस्तु को वास्तविक जीवन एवं व्यवसायिक परिस्थितियों से
जोड़ा जाता है।
विषय-वस्तु का
प्रस्तुतीकरण (Presentation
of Content)
1. व्याख्यान
पद्धति
शिक्षक व्यवसाय संबंधी अवधारणाओं को समझाते हैं।
2. चर्चा
एवं वाद-विवाद
व्यवसायिक समस्याओं पर समूह चर्चा कराई जाती है।
3. परियोजना
कार्य
विद्यार्थियों को बाजार सर्वेक्षण, बैंक
भ्रमण एवं व्यापारिक रिपोर्ट तैयार करने के कार्य दिए जाते हैं।
4. चार्ट
एवं दृश्य सामग्री
ग्राफ, चार्ट, मॉडल
एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाता है।
5. अध्ययन
भ्रमण
बैंक, उद्योग एवं व्यापारिक संस्थानों का
भ्रमण कराया जाता है।
CBSE एवं राज्य बोर्ड की
तुलना
|
आधार |
CBSE |
राज्य
बोर्ड |
|
पाठ्यक्रम स्वरूप |
राष्ट्रीय स्तर |
क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर आधारित |
|
शिक्षण दृष्टिकोण |
गतिविधि एवं परियोजना आधारित |
पारंपरिक एवं व्यवहारिक |
|
विषय-वस्तु |
व्यापक एवं आधुनिक |
स्थानीय संदर्भ पर आधारित |
|
मूल्यांकन |
आंतरिक एवं बाह्य मूल्यांकन |
मुख्यतः वार्षिक परीक्षा आधारित |
|
उद्देश्य |
वैश्विक एवं राष्ट्रीय दृष्टिकोण |
क्षेत्रीय एवं स्थानीय आवश्यकताएँ |
व्यवसाय संगठन शिक्षण
का महत्व
- विद्यार्थियों को व्यवसायिक ज्ञान प्राप्त
होता है।
- रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
- आर्थिक एवं सामाजिक जागरूकता विकसित होती
है।
- नेतृत्व एवं प्रबंधन कौशल का विकास होता
है।
- उद्यमिता एवं नवाचार को प्रोत्साहन मिलता
है।
निष्कर्ष
व्यवसाय संगठन का पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को व्यापार एवं
उद्योग की वास्तविक दुनिया से परिचित कराता है। Central Board of Secondary Education तथा विभिन्न राज्य बोर्ड विद्यार्थियों की आवश्यकताओं एवं
बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करते हैं। यह विषय
विद्यार्थियों में व्यावसायिक ज्ञान, कौशल,
नैतिकता एवं उद्यमिता की भावना विकसित करता है। इसलिए व्यवसाय
संगठन का प्रभावी शिक्षण राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए अत्यंत
आवश्यक है।