प्रस्तावना (Introduction)
पृथ्वी की सतह के अंदर अचानक ऊर्जा के मुक्त होने से उत्पन्न कंपन को भूकंप कहते हैं। यह एक प्राकृतिक आपदा है, जो पृथ्वी की आंतरिक गतियों के कारण उत्पन्न होती है। भूकंप मुख्यतः टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों, भ्रंश (Faulting), ज्वालामुखी विस्फोट तथा भूमिगत विस्फोटों के कारण आते हैं। जब पृथ्वी की प्लेटें आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या अलग होती हैं, तब अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो भूकंपीय तरंगों के रूप में पृथ्वी की सतह तक पहुँचती है और कंपन पैदा करती है। भूकंप का केंद्र पृथ्वी के भीतर जिस स्थान पर होता है उसे उद्गम केंद्र (Focus) तथा उसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को अधिकेंद्र (Epicenter) कहा जाता है। भूकंप की तीव्रता को रिक्टर पैमाने (Richter Scale) पर मापा जाता है। हल्के भूकंप सामान्यतः कम नुकसान पहुँचाते हैं, जबकि तीव्र भूकंप भवनों, सड़कों, पुलों एवं अन्य संरचनाओं को भारी क्षति पहुँचा सकते हैं। इसके कारण जान-माल की हानि, भूस्खलन, आग लगना तथा समुद्री क्षेत्रों में सुनामी जैसी गंभीर घटनाएँ भी हो सकती हैं। भूकंप मानव जीवन और पर्यावरण दोनों को प्रभावित करते हैं, इसलिए भूकंपरोधी निर्माण, आपदा प्रबंधन एवं जन-जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
भूकंप के प्रमुख कारण (Major Causes of Earthquake)
1. टेक्टोनिक प्लेटों की गति (Movement of Tectonic Plates)
भूकंप का सबसे प्रमुख कारण पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। पृथ्वी की ऊपरी सतह कई बड़ी एवं छोटी प्लेटों में विभाजित है, जो लगातार धीरे-धीरे गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, अलग होती हैं या एक-दूसरे के ऊपर खिसकती हैं, तब अत्यधिक दबाव उत्पन्न होता है। यह दबाव अचानक मुक्त होने पर भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलता है, जिससे भूकंप आता है। विश्व के अधिकांश बड़े भूकंप प्लेट सीमाओं के आसपास ही उत्पन्न होते हैं।
2. ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption)
ज्वालामुखी गतिविधियाँ भी भूकंप का महत्वपूर्ण कारण हैं। जब पृथ्वी के भीतर स्थित मैग्मा अत्यधिक दबाव के कारण ऊपर की ओर बढ़ता है और विस्फोट करता है, तब पृथ्वी की सतह में कंपन उत्पन्न होता है। ज्वालामुखीय क्षेत्रों में आने वाले भूकंप सामान्यतः सक्रिय ज्वालामुखियों के आसपास अधिक पाए जाते हैं। ये भूकंप कभी-कभी ज्वालामुखी विस्फोट से पहले चेतावनी संकेत के रूप में भी देखे जाते हैं।
3. भूमिगत विस्फोट (Underground Explosions)
मानव द्वारा किए गए भूमिगत विस्फोट भी भूकंप का कारण बन सकते हैं। खनन कार्य, परमाणु परीक्षण, बड़े बांधों का निर्माण तथा भारी विस्फोटक पदार्थों के उपयोग से पृथ्वी की आंतरिक संरचना में कंपन उत्पन्न होता है। यद्यपि ऐसे भूकंप प्राकृतिक भूकंपों की तुलना में कम तीव्र होते हैं, फिर भी ये स्थानीय क्षेत्रों में नुकसान पहुँचा सकते हैं। वैज्ञानिक इन कृत्रिम भूकंपों का अध्ययन पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने के लिए भी करते हैं।
4. भ्रंश (Faulting)
भ्रंश पृथ्वी की चट्टानों में उत्पन्न दरार या टूटन को कहा जाता है। जब चट्टानों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, तो वे टूटकर खिसक जाती हैं। इस अचानक खिसकने से ऊर्जा मुक्त होती है, जिससे भूकंप उत्पन्न होता है। भ्रंश क्षेत्रों में भूकंप की संभावना अधिक होती है क्योंकि वहाँ प्लेटों एवं चट्टानों की गतिविधियाँ लगातार जारी रहती हैं। विश्व के कई बड़े विनाशकारी भूकंप सक्रिय भ्रंश क्षेत्रों में ही आए हैं।
भूकंप के प्रभाव
- जान-माल की भारी हानि
- भवनों एवं सड़कों का विनाश
- सुनामी की संभावना
- भूस्खलन एवं दरारें
भूकंप से बचाव
- भूकंपरोधी भवन निर्माण
- आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण
- सुरक्षित स्थानों का चयन
- जागरूकता अभियान चलाना
- आपातकालीन किट तैयार रखना