Children with Disabilities: Hearing Impairment, Visual Impairment, Voice Impairment and Orthopedic विकलांग बच्चों के प्रकार: श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित, स्वर बाधित और अस्थि बाधित

प्रस्तावना

समाज में प्रत्येक बालक विशेष होता है और उसे शिक्षा प्राप्त करने का समान अधिकार है। कुछ बच्चे शारीरिक, मानसिक या संवेदी बाधाओं के कारण सामान्य बच्चों की तुलना में अलग प्रकार की सहायता और सुविधाओं की आवश्यकता रखते हैं। ऐसे बच्चों को विशेष आवश्यकता वाले या विकलांग बच्चे कहा जाता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बालक का सर्वांगीण विकास करना है। इसलिए विद्यालयों और शिक्षकों का दायित्व है कि वे विकलांग बच्चों की आवश्यकताओं को समझें और उनके अनुसार शिक्षण व्यवस्था करें। विकलांग बच्चों में श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित, स्वर बाधित तथा अस्थि बाधित बच्चे प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन बच्चों के लिए विशेष शिक्षण विधियों, सहायक उपकरणों तथा समावेशी शिक्षा की आवश्यकता होती है।

विकलांग बच्चों का अर्थ

वे बच्चे जिनमें किसी प्रकार की शारीरिक, संवेदी या कार्यात्मक कमी होती है, जिसके कारण उनकी सामान्य गतिविधियाँ एवं सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, विकलांग बच्चे कहलाते हैं। भारत के “दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016” के अनुसार प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को समान अवसर, शिक्षा और सम्मान का अधिकार प्राप्त है।

1. श्रवण बाधित बच्चे (Hearing Impaired Children)

अर्थ

वे बच्चे जो सुनने में पूर्ण या आंशिक रूप से असमर्थ होते हैं, श्रवण बाधित कहलाते हैं। ऐसे बच्चों को ध्वनि सुनने, भाषा समझने तथा बोलने में कठिनाई होती है।

श्रवण बाधिता के प्रकार

1. आंशिक श्रवण बाधिता

इसमें बच्चा कुछ हद तक सुन सकता है लेकिन सामान्य ध्वनियों को स्पष्ट रूप से नहीं सुन पाता।

2. पूर्ण श्रवण बाधिता

इस स्थिति में बच्चा बिल्कुल सुन नहीं सकता।

श्रवण बाधिता के कारण

  1. जन्मजात दोष
  2. कान में संक्रमण
  3. अत्यधिक शोर
  4. दुर्घटना
  5. पोषण की कमी
  6. आनुवंशिक कारण

श्रवण बाधित बच्चों की विशेषताएँ

  1. भाषा विकास में कठिनाई
  2. संप्रेषण समस्या
  3. सामाजिक समायोजन में कठिनाई
  4. ध्यान की कमी
  5. आत्मविश्वास में कमी

श्रवण बाधित बच्चों के लिए शिक्षण उपाय

  1. सांकेतिक भाषा का प्रयोग
  2. श्रवण यंत्रों का उपयोग
  3. दृश्य सामग्री का अधिक प्रयोग
  4. स्पष्ट एवं धीमी गति से बोलना
  5. सामने बैठाने की व्यवस्था
  6. व्यक्तिगत ध्यान देना

2. दृष्टि बाधित बच्चे (Visually Impaired Children)

अर्थ

वे बच्चे जो पूर्ण या आंशिक रूप से देखने में असमर्थ होते हैं, दृष्टि बाधित कहलाते हैं।

दृष्टि बाधिता के प्रकार

1. आंशिक दृष्टि बाधिता

बच्चा सीमित रूप से देख सकता है।

2. पूर्ण दृष्टिहीनता

बच्चा बिल्कुल नहीं देख सकता।

दृष्टि बाधिता के कारण

  1. जन्मजात दोष
  2. आँखों का संक्रमण
  3. विटामिन ‘A’ की कमी
  4. दुर्घटना
  5. आनुवंशिक कारण

दृष्टि बाधित बच्चों की विशेषताएँ

  1. पढ़ने-लिखने में कठिनाई
  2. गतिशीलता में समस्या
  3. दूसरों पर निर्भरता
  4. आत्मविश्वास में कमी
  5. श्रवण शक्ति का अधिक उपयोग

दृष्टि बाधित बच्चों के लिए शिक्षण उपाय

  1. ब्रेल लिपि का प्रयोग
  2. ऑडियो सामग्री उपलब्ध कराना
  3. स्पर्श आधारित शिक्षण
  4. बड़े अक्षरों वाली पुस्तकें
  5. सुरक्षित वातावरण प्रदान करना
  6. सहायक तकनीकों का उपयोग

3. स्वर बाधित बच्चे (Voice Impaired Children)

अर्थ

वे बच्चे जिनकी वाणी स्पष्ट नहीं होती या बोलने में कठिनाई होती है, स्वर बाधित कहलाते हैं।

स्वर बाधिता के प्रकार

  1. हकलाना
  2. तुतलाना
  3. अस्पष्ट उच्चारण
  4. आवाज़ में कमजोरी

स्वर बाधिता के कारण

  1. जन्मजात दोष
  2. मानसिक तनाव
  3. श्रवण दोष
  4. गले की बीमारी
  5. न्यूरोलॉजिकल समस्या

स्वर बाधित बच्चों की विशेषताएँ

  1. स्पष्ट बोलने में कठिनाई
  2. संकोच एवं झिझक
  3. सामाजिक अलगाव
  4. आत्मविश्वास में कमी
  5. संप्रेषण में समस्या

स्वर बाधित बच्चों के लिए शिक्षण उपाय

  1. भाषण चिकित्सा (Speech Therapy)
  2. धैर्यपूर्वक सुनना
  3. बोलने का अभ्यास करवाना
  4. सकारात्मक वातावरण प्रदान करना
  5. उपहास से बचाना
  6. प्रोत्साहन देना

4. अस्थि बाधित बच्चे (Orthopedically Impaired Children)

अर्थ

वे बच्चे जिनकी हड्डियों, मांसपेशियों या शरीर के अंगों में विकृति या कमजोरी होती है, अस्थि बाधित कहलाते हैं।

अस्थि बाधिता के कारण

  1. पोलियो
  2. दुर्घटना
  3. जन्मजात विकार
  4. मांसपेशियों की कमजोरी
  5. हड्डियों से संबंधित रोग

अस्थि बाधित बच्चों की विशेषताएँ

  1. चलने-फिरने में कठिनाई
  2. शारीरिक गतिविधियों में सीमित भागीदारी
  3. दूसरों पर निर्भरता
  4. थकान की समस्या
  5. भावनात्मक तनाव

अस्थि बाधित बच्चों के लिए शिक्षण उपाय

  1. रैम्प एवं व्हीलचेयर की व्यवस्था
  2. बैठने की उचित व्यवस्था
  3. सहायक उपकरणों का उपयोग
  4. शारीरिक गतिविधियों में सहयोग
  5. आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करना
  6. समावेशी वातावरण तैयार करना

समावेशी शिक्षा में शिक्षक की भूमिका

1. समान अवसर प्रदान करना

शिक्षक को सभी बच्चों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।

2. सकारात्मक वातावरण बनाना

विद्यालय में सहयोग एवं सम्मान का वातावरण होना चाहिए।

3. व्यक्तिगत शिक्षण

प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता के अनुसार शिक्षण करना चाहिए।

4. सहायक तकनीकों का उपयोग

ब्रेल, श्रवण यंत्र, सांकेतिक भाषा एवं अन्य तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।

5. अभिभावकों से सहयोग

शिक्षकों को अभिभावकों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना चाहिए।

समावेशी शिक्षा का महत्व

  1. सभी बच्चों को समान शिक्षा का अवसर मिलता है।
  2. आत्मविश्वास एवं सामाजिक समायोजन बढ़ता है।
  3. भेदभाव की भावना कम होती है।
  4. सहयोग एवं सहानुभूति का विकास होता है।
  5. बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव होता है।

निष्कर्ष

विकलांग बच्चे समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें दया नहीं बल्कि समान अवसर, सम्मान और सहयोग की आवश्यकता होती है। श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित, स्वर बाधित तथा अस्थि बाधित बच्चों के लिए विशेष शिक्षण व्यवस्था एवं सहायक साधनों का उपयोग आवश्यक है। समावेशी शिक्षा के माध्यम से इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा सकता है। शिक्षक, अभिभावक और समाज यदि मिलकर सहयोग करें, तो ये बच्चे भी अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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